7 अगस्त 2019 - 13:32
ईरान की ओर सऊदी अरब और इमारात का स्पष्ट झुकाव

ईरान की ओर सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के स्पष्ट झुकाव ने हालिया दिनों में संसार के बहुत से संचार माध्यमों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है।

सऊदी अरब और संयुक्त इमारात ने हालिया हफ़्तों विशेष कर हालिया दिनों में ईरान के संबंध में अपने रुख़ में ध्यान योग्य बदलाव किया है। इमारात के उप विदेश मंत्री अनवर क़रक़ाश ने, जो ईरान के ख़िलाफ़ अपने कड़े व चरमपंथी रुख़ के लिए मशहूर हैं, हाल ही में एक ट्वीट करके कहा है कि अबू धाबी और रियाज़ ईरान के संबंध में टकराव के बजाए राजनैतिक रवैये को प्राथमिकता दे रहे हैं।

 

छः साल के बाद तेहरान में ईरान व इमारात के तटरक्षक बलों की संयुक्त बैठक का आयोजन दोनों देशों के संबंधों में एक अहम बदलाव है। इमारत के तटरक्षक बल के शिष्टमंडल की तेहरान यात्रा के बाद एक और दल ने ईरान का दौरा किया और उसके दौरे का लक्ष्य ईरान के साथ बैंकिंग सहयोग के लिए अबू धाबी की तैयारी की घोषणा करना बताया गया। इमारात ने दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को मज़बूत बनाने के मार्गों की समीक्षा के लिए यह दल तेहरान भेज कर, वह भी ऐसी स्थिति में जब ईरान पर प्रतिबंध लगे हुए हैं, तेहरान को एक अहम सकारात्मक सिग्नल दे दिया। उसी समय एक इस्राईली वेबसाइट ने बताया कि सऊदी अरब और इमारात ने ईरान के साथ अपने ख़ुफ़िया संपर्कों को बढ़ा दिया है और सऊदी युवराज बड़ी गंभीरता से ईरान से वार्ता शुरू करने की समीक्षा कर रहे हैं।

 

इन सारी घटनाओं में ध्यान योग्य बिंदु यह है कि ये घटनाएं केवल कुछ ही दिनों में और एक के बाद एक क्रमबद्ध ढंग से घटी हैं जिससे पता चलता है कि ईरान के संबंध में सऊदी अरब और इमारात के रुख़ में परिवर्तन एक स्पष्ट कार्यक्रम के अंतर्गत आ रहा है। शायद कहा जा सकता है कि इन दोनों देशों के रुख़ में इस परिवर्तन की एक वजह, क्षेत्र में ईरान की हालिया कार्यवाहियां और ट्रम्प के वर्चस्ववाद को नीचा दिखाना है। ईरान की ओर से अमरीकी ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद अमरीका के घटक अरब देशों को आशा थी कि वह तेहरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्यवाही करेगा लेकिन ट्रम्प के पीछे हट जाने के बाद फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती अरब देश ईरान के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने पर मजबूर हो गए।

 

अमरीकी ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद, अमरीका के घटक अरब देशों को गहरा झटका लगा और इसके बाद इमारात के राष्ट्राध्यक्षों ने एक गुप्त मीटिंग की जिसमें अबू धाबी के युवराज मुहम्मद बिन ज़ायद और दुबई के शासक मुहम्मद बिन राशिद उपस्थित थे। दुबई के शासक ने इस बैठक में अपने देश की विदेश नीति पर टिप्पणी करते हुए उस पर पुनर्विचार किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर ईरान से एक भी मीज़ाइल इमारात पर आ कर गिरा तो यह देश अरब पूंजी निवेशकों से ख़ाली हो जाएगा और एशियाई मज़दूर भी यहां नहीं रुकेंगे। ईरान ने हमेशा ही क्षेत्र के देशों विशेष कर पड़ोसी देशों के साथ सहयोग व वार्ता का स्वागत किया है। ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने हाल ही में घोषणा की है कि संयुक्त अरब इमारात भी, सऊदी अरब और बहरैन की तरह हमारा पड़ोसी है और ईरान के अधिकारियों ने हमेशा ही कहा है कि वे अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों के इच्छुक हैं। ज़रीफ़ ने कहा कि अगर वे अपनी नीतियों को बदल दें और अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करें तो मुझे आशा है कि "बी टीम" कम हो कर बेनयामिन नेतनयाहू और बोल्टन तक सीमित हो जाएगी।

 

कुछ टीकाकारों का कहना है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के रुख़ में यह परिवर्तन, रणनैतिक है और ईरान के ख़िलाफ़ रणक्षेत्र में भूमिकाओं को बांटने के अमरीका के आदेश के अंतर्गत सामने आ रहा है लेकिन इस परिवर्तन का कारण जो भी हो उसकी समीक्षा क्षेत्र की हालिया परिस्थितियों को दृष्टिगत रखे बग़ैर नहीं की जा सकती और न ही क्षेत्र में ईरान के क़दमों और मध्यपूर्व के परिवर्तनों में ईरान की भूमिका की अनदेखी की जा सकती है।